*इकबाल बाबासाहेब मुल्ला*
( *पत्रकार*)
संपादक - वेध मीडिया न्यूज,सांगली
*मोबाईल - 8983587160*
आज मुस्लिम लडकीयां मां - बाप की *इज्जत* नीलाम करके, "मुर्तद" हो रही हे.. *लव्हमॅरेज* कर रही हे ..इसके जिम्मेदार कोन ?
अच्छे *संस्कार* ना होना, मां - बाप का *प्यार* ना मिलना, *अँड्रॉइड मोबाईल* लडकियोंको देना, "वक्त" पर लडकी की *शादी* ना करना, और घर में "दिनी" माहोल ना होना, सबसे बडी बात *अल्लाह* का डर दिलमें ना होना ये भी "मुर्तद" होने की खास वजह बन रही हे.
*लडकीया मूर्तद होना किस बात का सबब हे ??*
सही वक्त पे शादी ना करने का अंजाम सिर्फ लडकियोंका मुर्तद होना नहीं हे बल्की अपने लडकियों पर *मां - बाप* के अच्छे *संस्कार* ना होना, लडकियों पर *ध्यान* ना होना ये भी लडकीया मुर्तद होने का सबब हे .
*सांगली - महाराष्ट्र* और पुरे हिंदुस्थान में इस्लामी लडकीया मुर्तद हो रही हे. घर में मां -बाप *मुसलमान* हे लेकिन उनका *व्यवहार गैरमुस्लिम* जैसा होता हो..घर में *नमाज* का माहोल ना होना,जिक्र का ना होना, *अल्लाह का डर* ना होना,*बाप* का *शराब* पिना, बाप के *2-3 शादिया* होना ,इसका सिधा *असर* "नाबालिग" लडकियों पर पडता नहीं होगा ?? उस लडकी को भी मां - बाप की तरह कुछ "गलत" नहीं लगता होगा, इसलिये तो ये लडकीया ऐसे *लव्ह मॅरेज* का कदम उठाती होगी क्या ?? दुसरी बात ,*दिन जानने वाले* अच्छे घरसे भी "अच्छी तालीम" सीखी हुई लडकीया भी "मुर्तद" हुयी हे. इसकी "वजह" क्या होगी ??
*सही वक्त पे शादी ना होना ये भी खास वजह !*
लडकी *बालिग* होने के बाद 18 साल की होने के बाद लडकीकी शादी करने का इस्लाम में कहा गया हे. लेकिन आज लडकी *22 से 36 तक* हो जाती हे ..लेकिन लडकी की शादी नहीं होती. अच्छे रिश्ते के 'इंतजार" में मां -बाप -लडकी रिश्ते *ठुकराती* हे और "उमर रुकने" का नाम नहीं लेती.इसके बाद किसी *दुकान - कारखाना* या जिधर पैसे मिलते हे उधर ये लडकी काम को जाती हे.और किसी से *चक्कर* चलता हे. शादी नां होने का टेन्शन होता हे ..और ये लडकी किसी के बहकावे में आती हे और *गैरके* साथ शादी कर बेठती हे.
*मां - बाप का लडकियोंको मोबाईल देना सही हे ??*
अक्सर लडकीया मोबाईल से बिघडती हे ऎसा कहा जाता हे.*कॉलेज या स्कूल* में लडकियोंको मोबाईल देना सही हे क्या ?? कीपॅड वाला *बटन का मोबाईल* देना एक बार समझ सकते हे लेकिन *अँड्रॉइड मोबाईल* से अच्छी लडकीया भी बहक जाती हे.इसलिये लडकी अकेली 'कॉलेज" जाती होगी तो *सुरक्षा* को देखते हुये साधा मोबाईल देना सही हे.लेकिन अँड्रॉइड मोबाईल लडकियोंके "मुर्तद" की *जड* बन रही हे. *इंस्टाग्राम - व्हाट्सअप -फेसबुक* इन माध्यमसे ये लडकीया अपना "वजुद" खो देती हे.!
*सिर्फ बच्चे पैदा करना मां -बाप का फर्जं नहीं हे !*
अपने बच्चे की सही तालीम - *शिक्षण* देना मां -बाप की सबसे बडी जिम्मेदारी हे. अच्छे *संस्कार*, अच्छी सोच बच्चे की जिंदगी *जन्नत* बना देती हे. क्या मां -बाप अपने बच्चे के साथ सुबह का *नाष्टा*, दोपहर - रात में *खाना* साथ - साथ खाते हे ?? रात में सब लोग आपस में *मशवरा* (चर्चा) करते हे ?? रात में खाना *खाने के बाद* सभी लोग (मिया -बीवी -बच्चे ) साथ - साथ *चलते* हे ?? अगर आप ऎसा करते हे तो अपनी फॅमिली के बीच एक अनोखा *भावनिक गहरा रिश्ता"* बन जाता हे. अपनी बच्चीयां *फ्री* होकर बाते करती हे..और वो *गलत* कदम नहीं उठाती.
बच्चे *पैदा* करना बडी बात नहीं बल्की उनकी सही *देखभाल* करना,और "शादी" करके मां -बाप का *हक* अदा करना बडी बात हे.
सभी मां - बाप अपनी लडकियों पर ध्यान दे.क्योंकी ये तुम्हारीही "जिम्मेदारी" हे ..!
. *इकबाल बाबासाहेब मुल्ला*
( *पत्रकार*)
संपादक - सांगली वेध
संपादक - वेध मीडिया न्यूज,सांगली
*मोबाईल - 8983587160*





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